विश्नोई समाज कि पुत्री का का हुआ चयन

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संरक्षित: पीपासर नगर भीमसागर में धतरवाल परिवार ने लिया एक सहरानीय कदम नशा मुक्त परिवार

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मिशन ग्लोबल ब्रांड खेजङली 363 विश्नोई को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान, संसद में श्रंदाजली दे। मिशन मैन – विशेक विश्नोई

#खेजड़ली_शहिदों_के_सम्मान_में_आखिर_बिश्नोई #समाज_के_सभी_संगठन_एक_जाजम_पर_क्यों_नहीं?

@लेखक :- #सुधीर_बिश्नोई_जनर्लिस्ट

नमस्कार प्रिय बन्धुओं, जैसा की आप सभी को सर्वविदित है कि बिश्नोई समाज द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में सन 1730 में खेजड़ली गांव में पेड़ों की रक्षा के लिए 363 लोग शहीद हुऐ थे , उन शहीदों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए तथा संसद भवन में उन्हें श्रद्धांजलि देने और मां अमृता देवी तथा खेजड़ली शहीद स्मारक को राष्ट्रीय धरोहर में शामिल किया जाए इन तमाम मांगों को लेकर के मिशन मैन विषेक विश्नोई के नेतृत्व में विश्नोई समाज तथा सर्व समाज के लोग जिन्होंने अपनी यात्रा राजस्थान की सांस्कृतिक नगरी कहे जाने वाले जोधपुर से शुरू की थी वहां उन्होंने 5 दिन का अपना धरना प्रदर्शन कर कर जिला कलेक्टर के मार्फत देश के प्रधानमंत्री एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री को ज्ञापन दिया था, लेकिन कुछ समय बीत जाने के बावजूद कुछ उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई तो उन्होंने अपने द्वितीय चरण में राजस्थान की राजधानी जयपुर विधानसभा भवन के पास 5 दिन को अपना धरना प्रदर्शन कर के मुख्य सचिव राजस्थान सरकार के मार्फत राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तथा देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को ज्ञापन दिया लेकिन उनके बावजूद भी कुछ कार्यवाही नहीं हुई तो आखिर में मिशन मैन विषेक विश्नोई व उनकी पूरी टीम ने अपना तीसरा पड़ाव देश की राजधानी दिल्ली के हृदय स्थल रामलीला मैदान में करने का निर्णय लिया जाहिर सी बात है कि दिल्ली जैसी जगह में प्रोटेस्ट करना अपने आप में एक बहुत बड़ा काम होता है क्योंकि वहां पर आपको इतनी सारी फॉर्मेलिटी जो अनुमतियां प्राप्त करनी होती है जिनके लिए आपको कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं और आखिर में जब तक आपको एमसीडी परमिशन नहीं देती तब तक आप प्रोटेस्ट नहीं कर सकते हो लेकिन उन सब के बावजूद उन्होंने अपने सारे काम पूर्ण करके वर्तमान में वह दिल्ली के अंदर अपना प्रोटेस्ट कर रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मैं एक पत्रकार होने के नाते जब अपना रिसर्च कर रहा था कि सोशल मीडिया से एक छोटी सी चिंगारी शुरू हुई थी लेकिन वह आज एक भयंकर रूप नहीं ले सकी इसका आखिर कारण क्या रहा जब सोशल मीडिया पर एक छोटी सी चीज अगर वायरल हो जाती है तो रातों-रात उस चीज को वायरल करने वाला इंसान सेलिब्रिटी बन जाता है लेकिन 363 शहिदों की बात आज से साढे पाच सौ साल पहले इस देश में एकमात्र ऐसा अनूठा उदाहरण पेश हुआ था लेकिन उनकी बात अभी तक सत्ता पर बैठे हुकमरानों के पास क्यों नहीं पहुंची। इसके पीछे साफ मंशा यह है इस पूरे प्रकरण में राजनीतिकरण हो गया है कुछ लोग यह चाहते हैं कि अगर 363 खेजड़ली शहीदों को अगर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई तो हमारा राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा इसीलिए वह लोग अपना राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जो समाज के चर्चित चेहरे हैं वह इन बातों पर बोलने से अपने आप को कतराते हैं या फिर वह मीडिया के सामने आने से अपने आप को रोकते हैं मुझे यह बात कहते हुए दुर्भाग्य वंश अच्छा नहीं लगता है लेकिन मुझे आज कह नहीं पड़ रही है कि जो लोग अपने नाम के पीछे धड़ल्ले से बिश्नोई सरनेम लगाते हैं लेकिन उनको यह पता नहीं है कि हम मां अमृता देवी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अपना भरसक प्रयास नहीं करते हैं हम चाहते हैं कि इस चीज को राजनीतिकरण किया जाए ताकि इनका फायदा किसी व्यक्ति विशेष को नहीं मिलता है लेकिन आप लोगों को शर्म इस बात पर आनी चाहिए कि हमें आखिर जब समाज की बात आती है तो हमें आगे आना चाहिए और जब तक हम समाज के सभी लोग एक साथ इकट्ठे नहीं होंगे तब तक इस प्रकार के मुद्दों पर डिस्कशन करना समाज के राजनीतिक पहुच के लोग चाहे वह किसी भी पार्टी या संगठन से जुड़े हुए हो वे आगे नहीं आएंगे तब तक इस प्रकार के प्रोटेस्ट में हम सफलता नहीं प्राप्त कर सकते हैं हम आप सभी लोगों से गुजारिश करते हैं कि संगठन किसी से जुड़े हुए इंसान हो जब तक हम सभी समाज की बात होती है तब एक जाजम पर एक्टिव नहीं होंगे तो हमारा सुनाई करने वाला कोई नहीं होगा और हम दिनोंदिन कमजोर होते चले जाएंगे हमनेें एक एक बात का करीबी से रिसर्च किया तो हमें पता चला कि समाज के राजनीतिक वर्चस्व रखने वाले लोग भी अपने आप को इस प्रकार के मुद्दों में पीछे खींच लेते हैं जबकि चुनाव के समय समाज उनको आगे करके उनके पीछे खड़ी होती हैं लेकिन इस प्रकार के लोग अगर समाज के नाम पर अगर एक के नहीं होंगे तो इस समाज का क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही जानता है

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मिशन ग्लोबल ब्रांड 363 को पहचान दिलाने का प्रयास जारी

मिशन ग्लोबल ब्रांड 363 को विश्व स्तर पर शहीदों को
दर्जा दिलाने के का प्रयास चल रहा है।
अगला पङाव दिल्ली में आयोजित किया जाएगा इसमें ज्यादा से ज्यादा भाग लेने वाले व्यक्ति दिल्ली पहुंचे।

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इसके अलावा कोई भी व्यक्ति अपना सहयोग देना चाहते हैं वो दे सकते हैं पोस्टर पर विशेक विश्नोई के नम्बर पर फोन करके जानकारी ले सकते हैं।

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आज हमें गर्व है कि विश्नोई समाज के युवा लोग किस तरह सक्षम है।

संवाददाता – अशोक धतरवाल विश्नोई
भीम सागर
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एक अनोखी कहानी- शहीद अमृता देवी विश्नोई / 363

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गुरु जम्भेवर भगवन ने २९ नियम बताये । गुरु जम्भेवर महाराज के बताये २९ नियमों को पालन करने वाले जन विश्नोई जन कह्लाये । गुरु महाराज के बताये २९ में से १९ वे नियम पेड़ पोधो की रक्षा करना पर पूर्ण रूप से खरा उतरने के लिए २२४ वर्ष पूर्व एक के बाद एक बिश्नोई समाज के कुल 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। तब से लेकर आज तक बिश्नोई समाज इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाता आ रहा है।

बिश्नोई समाज आज भी मानता है कि ‘सिर सांटे रुख रहे तो भी सस्तो जाण” अर्थात सिर कटाकर भी पेड़ की रक्षा की जाए तो यह काफी सस्ती है।

केसे हुआ बलिदान तथा किस तरह किया गुरूजी के नियम का पालन :

1787 में राजस्थान के मारवाड (जोधपुर) रियासत पर महाराजा अभय सिंह का राज था। उनका मंत्री गिरधारी दास भण्डारी था।
उस समय महराण गढ़ किले में फूल महल नाम का राजभवन का निर्माण किया जा रहा था। महल निर्माण के दौरान लकड़ियों की आवश्यकता पड़ी तो महाराजा अभय सिंह ने मंत्री गिरधारी दास भण्डारी को लकडियों की व्यवस्था करने का आदेश दिया , मंत्री गिरधारी दास भण्डारी की नजर महल से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित गांव खेजडली पर पड़ी। मंत्री गिरधारी दास भण्डारी अपने सिपाहियों के साथ 1787 में भादवा सुदी 10वीं मंगलवार के दिन खेजडली गांव पहुंच गए।

उन्होंने रामू खोड नामक बिश्नोई समाज के व्यक्ति के खेजड़ी के वृक्ष को काटना आरंभ कर दिया। कुल्हाड़ी की आवाज सुनकर रामू खोड की पत्नी अमृता बिश्नोई घर से बाहर आई। उसने बिशनेई धर्म के नियमों का हवाला देते हुए पेड़ काटने से रोका लेकिन सिपाही नहीं माने। इस पर अमृता बिश्नोई पेड़ से चिपक गई और कहा कि पहले मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े होंगे-इसके बाद ही पेड़ कटेगा।

राजा के सिपाहियों ने उसे पेड़ से अलग करने की काफी कोशिश की परंतु अमृता टस से मस नहीं हुई। इसके बाद सिपाहियों ने अमृता पर ही कुल्हाड़ी चलाना आरंभ कर दिया। अमृता बिश्नोई के अंग कट-कट कर जमीन पर गिरने लगे इसके बाद भी उसने गुरु महाराज की आज्ञा का पूरी तरह से पालन किया।

अपनी माता के बलिदान को देखकर उसकी तीन पुत्रियों ने भी इसी प्रकार बलिदान दे दिया। इसके बाद पूरे गांव के बिश्नोई समाज ने पेड़ों को काटने से बचाने के लिए चिपको आंदोलन खड़ा कर दिया। पेड़ों को बचाने के लिए एक के बाद एक करके गांव के 363 बिश्नोइयों ने अपना बलिदान दे दिया। इनमें 71 महिलाएं व 292 पुरुष थे।

इसकी सूचना जब राजा अभय सिंह को मिली तो उन्हें काफी सदमा पहुंचा और उन्होंने वहां आकर बिश्नोई समाज से माफी मांगी । उन्होंने ताम्र पत्र देकर विश्नोई समाज को आश्वस्त किया की जन्हा कही भी किसी भी गाव मैं विश्नोई निवास करंगे वाह पेड़ कभी भी नहीं काटे जायेंगे ।

तब से लेकर आज तक भादवा सुदी 10वीं को बलिदान दिवस के रुप में खेजडली गांव में बिश्नोई समाज के लोगों का मेला लगता है। इस मेले में बिश्नोई समाज से जुड़े लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और बलिदानियों को नमन करते हैं।

देखे पूरी फिल्म :: ‘Khejarli ‘ An animated Marwari Film

खेजडी वृक्ष का महत्त्व::

खेजड़ी को शमी वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह मूलतः रेगिस्तान में पाया जाने वाला वृक्ष है जो थार के मरुस्थल एवं अन्य स्थानों पर भी पाया जाता है। अंग्रेजी में शमी वृक्ष प्रोसोपिस सिनेरेरिया के नाम से जाना जाता है।

रामायण में महत्त्व

विजयादशमी या दशहरे के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने की प्रथा है। मान्यता है कि यह भगवान श्री राम का प्रिय वृक्ष था और लंका पर आक्रमण से पहले उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा कर के उससे विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। आज भी कई स्थानों पर ‘रावण दहन’ के बाद घर लौटते समय शमी के पत्ते स्वर्ण के प्रतीक के रूप में एक दूसरे को बाँटने की प्रथा हैं, इसके साथ ही कार्यों में सफलता मिलने कि कामना की जाती है।

महाभारत में महत्त्व

शमी वृक्ष का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। अपने 12 वर्ष के वनवास के बाद एक साल के अज्ञातवास में पांडवों ने अपने सारे अस्त्र शस्त्र इसी पेड़ पर छुपाये थे जिसमें अर्जुन का गांडीव धनुष भी था। कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध के लिये जाने से पहले भी पांडवों ने शमी के वृक्ष की पूजा की थी और उससे शक्ति और विजय प्राप्ति की कामना की थी। तभी से यह माना जाने लगा है कि जो भी इस वृक्ष कि पूजा करता है उसे शक्ति और विजय प्राप्त होती है –

शमी शमयते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी ।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी ॥
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया ।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता ॥

अन्य कथा

अन्य कथा के अनुसार कवि कालिदास ने शमी के वृक्ष के नीचे बैठ कर तपस्या कर के ही ज्ञान की प्राप्ति की थी।

मान्यताएँ
शमी वृक्ष की लकड़ी यज्ञ की समिधा के लिए पवित्र मानी जाती है। शनिवार को शमी की समिधा का विशेष महत्त्व है। शनि देव को शान्त रखने के लिये भी शमी की पूजा करी जाती है। शमी को गणेश जी का भी प्रिय वृक्ष माना जाता है और इसकी पत्तियाँ गणेश जी की पूजा में भी चढ़ाई जाती हैं।

ऋग्वेद के अनुसार शमी के पेड़ में आग पैदा करने कि क्षमता होती है और ऋग्वेद की ही एक कथा के अनुसार आदिम काल में सबसे पहली बार पुरुओं ने शमी और पीपल की टहनियों को रगड़ कर ही आग पैदा की थी।
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संवाददाता – अशोक धतरवाल भीमसागर
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Whatsapp – 7023065718

श्री जम्भेश्वर भगवान् मन्दिर पीपासर नगर भीमसागर भव्य मेला 15.5.2018 को शुरू। zeerajasthan.wordpress.com

पीपासर नगर भीमसागर स्थित श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान् मन्दिर में गत दिनों में श्रीमद्-ंभागवत् कथा एवं मन्दिर कलश स्थापना हुई।
15.5.2018 हर साल श्री जम्भेश्वर भगवान् मन्दिर में मेले का आयोजन किया जाएगा । इस बीच पीपासर नगर वासियों में एक नया उत्सव एवं एक नई उमंग जगी।

संवाददाता ~ अशोक धतरवाल विश्नोई
अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें
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मिशन ग्लोबल ब्रांड 363 को विश्व स्तर पर दर्जा दिलाने की कोशिश -विशेक विश्नोई

आपको बता दें कि सन 1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में अमृता देवी के नेतृत्व में पेड़ों को कटने से बचाने के लिए 363 लोगों ने कुल्हाड़ी से सिर कटवाते हुए बलिदान दिया था। संस्था के लोगों का कहना है कि देश में पर्यावरण को लेकर इतनी बड़ी कुर्बानी आज तक किसी ने नहीं दी है ऐसे में आज के दौर में लोगों को ऐसी घटना याद दिलाना बेहद जरुरी है। ग्लोबल ब्रांड 363 ने सरकार के आगे 5 सूत्रीय मांगे रखी है जिनमें मुख्य मांग है कि जिन 363 लोगों ने पेड़ों के लिए अपनी जान को कुर्बान कर दिया था उन्हें पर्यावरण शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए और साथ ही साथ भारतीय संसद में उन्हें हर बार श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।
विश्नोई ग्लोबल ब्रांड 363 का मिशन रैली दिल्ली में
विशेक विश्नोई

संवाददाता – अशोक विश्नोई 7023065718

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